Sabse kathin paheliyan ! most difficult puzzle.
Sabse kathin paheliyan . Most difficult puzzle.
कृष्ण की में हूं प्यारी
मेरी ध्वनि सबसे न्यारी
लकड़ी देती मुझको रूप
मोहित होते मुझसे भूप
जीवन में वे दो बार आए
शिशु वृद्ध से दूर जाए
एक नही अनेक है वे
मोती नही पर वैसे है वे
ऐसा प्यार कहां है । बोलो
जिसको ना तुम कहीं भी तोलों
मिलता जीवन में एक बार
वह तुम पर जीवन दे वार
Sabse kathin paheliyan
महान कवि बंगाली थे
राष्ट्रीय गान के थे निर्माता
नोबेल पुरस्कार के विजेता
लगते थे वे बिल्कुल दाता।
छह मीटर का कपड़ा है
नही इसमें कोई लफ़ड़ा है।
नारी की पोशाक अनोखी
न्यारी मन को मोहित
चलती है पर नजर न आए
सबके मन को देखो भाए
न स्वाद है न ही रंग
न ही वस्तु न ही रंग
मेरा तन है बहुत मुलायम
और रंग सुहाना
मेरे मीठे फल की तुम
अंग्रेजी नही बनाना
चार खड़े है । चार पड़े है
बीच में ताने बाने
पशरे है लंबोदर दादा
लंबी चादर ताने
1 बांसुरी
2 दांत
3 मां
4 रवींद्रनाथ टैगोर
5 साड़ी
6 हवा
7 केला
8 खाट
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